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Maharishi Kakbhusundi | HINDUISM AND SANATAN DHARMA

Maharishi Kakbhusundi | HINDUISM AND SANATAN DHARMA

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Maharishi Kakabhusundi,,,

No civilization or nation has behaved as ignorant as we now have accomplished with our ancestors, our historical past,,they name their pebbles as mountain and we don’t miss telling our Brahmavetta sages to be referred to as #crow,,crow,,#complete inhabitants of Athens is that Could was 5 thousand when Socrates He used to talk one thing standing on the crossroads,, there have been 5 ten listeners,, but he made Socrates the daddy of philosophy,,

What did we do ?? ,,Brahmavetta,Mahapowerful,Aditya Brahmachari,,considered one of three nice lecturers of music,,Sriram devotee turned #Hanuman right into a monkey,,Maharshi Kakbhushundi as a crow,,,

Maharishi #Shringi says he was son of Angiras Gotriya Maharshi #Renuketu Pravhan,, in childhood when he studied in Maharshi Shruti’s Ashram his title was Brahmachari #Sojni,, however there’s a candy story behind the studying of Kaga Naam,, when he was kids his meals leaves Other than mom and father’s characters had been additionally made #false by tasting them,, the mom mentioned in laughter like a crow even when his abdomen is full, it’s a naughty boy,, so that they began calling the kid Kaga,,

Once they had been doing Vedadhyayan in Sojani Brahmachari #Shruti Rishi’s Ashram, they used to reply something precisely and immediately,, these days, which is named #Reprative Mati Hazir reply or high IQ,,
Even a standard #sanskrit resident is aware of that in Sanskrit #gun is named Bhushundi,, so his classmates who had been celibate Maharshi Lomash they name him the one who responds like bullet due to his duplicate benefit i.e.e. like bullet not completely fires,, Bhushun Began saying D

Maharshi Kakbhushundi #Ayurvedacharya was there,, it’s described that when he met Lord Shriram, he was 684 years outdated,, when Maharaja Ram mentioned, Hey Maharshi, you realize every little thing about Ayurveda,, how do you know a lot?? ,,Then Maharishi #Kakbhushundi mentioned, “Hey Ram,, I’ve spent 400 years trying to find Ayurveda research and medicines,, but I do know little or no,,
A terrific ebook on Ayurveda–#Chandrayaankrit Pothi was composed by that sage,,

Later composed an important ebook referred to as #Savita on calculation and discovery of cosmos and galaxies as a result of curiosity in science and analysis intelligence,,
These days in #Hollywood films it’s seen that they launch a missile which is behind the goal,, regardless of how a lot the goal is damaged, it modifications the path and turns it turns the other way, it at all times follows,, Maharshi Shrungi says that Maharshi Kakbhushundi has accomplished such a factor at the moment The instrument was invented whose title was– #Kagam #Chathavetu Yantra,, the inspiration to create which they received to see the crows flying like this,,,

One opinion of the sages is that due to that Kagam Chathavetu Yantra, their title grew to become crow,, #Bhushundi as a result of intense medha,,

I don’t know what sort of #Palmer intelligence is that he will get bent on turning his ancestors into crows and monkeys,, and the enjoyable is that we additionally agree,, get out of the rubbish most cancers written by the leftists and get to know your mighty ancestors, #Brahmavetta sages,, examine them extensively,

Courtesy: Swami Suryadev ji

Hindi translation

महर्षि काकभुशुण्डि,,,

जितना अज्ञानमूलक व्यवहार हमने अपने पूर्वजों,अपने इतिहास के साथ किया है उतना किसी सभ्यता या राष्ट्र ने नहीं किया,,वे अपने कंकड़ को भी पहाड़ बताते हैं और हम अपने ब्रह्मवेत्ता ऋषियों को भी #काग,,कौवा बताने कहने से नहीं चूकते,,#एथेंस की कुल आबादी ही उस समय पांच हज़ार थी जब सुकरात चौराहों पर खड़ा होकर कुछ बोलता था,, पांच दस सुनने वाले रहते थे,, फिर भी उन्होंने सुकरात को दर्शनशास्त्र का पिता बना दिया,,

हमने क्या किया??,,झूठी गप्पों कथाओं के माध्यम से ब्रह्मवेत्ता,महाबलशाली,आदित्य ब्रह्मचारी,,संगीत शास्त्र के तीन महान आचार्यों में से एक,,श्रीराम भक्त #हनुमान को बंदर बना लिया,, महर्षि काकभुषुण्डि को कौवा मान लिया,,,

महर्षि #श्रृंगी कहते हैं कि वे अंगिरस गोत्रीय महर्षि #रेणुकेतु प्रवाहण के पुत्र थे,, बचपन में जब वे महर्षि श्रुति के आश्रम में पढ़ते थे तब उनका नाम था ब्रह्मचारी #सोजनी,, लेकिन कागा नाम पड़ने के पीछे एक मधुर कथा है,, जब वे बालक थे तब अपने भोजन के पात्र के अलावा माता और पिताजी के पात्रों को भी #झूठा कर देते थे चखकर,, हंसी हंसी में माता ने कहा जैसे कागा पेट भरा होने पर भी कई जगह चोंच मारता है ऐसे ही यह नटखट बालक है,,तो वे बालक को कागा बुलाने लगी,,

जब वे सोजनी ब्रह्मचारी #श्रुति ऋषि के आश्रम में वेदाध्ययन कर रहे थे तब किसी भी बात का जवाब एकदम सटीक और तुरन्त देते थे,, आजकल जिसको #प्रत्युतपन्न मति हाज़िर जवाबी या high आई क्यू बोलते हैं,,
सामान्य #संस्कृत का परिचय रहने वाला भी जानता है कि संस्कृत में #बंदूक को भुशुण्डि बोलते हैं,, तो उनके जो सहपाठी ब्रह्मचारी थे महर्षि लोमश वे उन्हें उनकी प्रत्युतपन्न मेधा के कारण गोली की तरह जवाब देने वाला यानी कहते हैं न कि एकदम फायर करता है,, भुशुण्डि कहने लगे,,

महर्षि काकभुशुण्डि #आयुर्वेदाचार्य तो थे ही,,वर्णन आता है कि जब वे प्रभु श्रीराम से मिले उस समय उनकी उम्र 684 वर्ष थी,, महाराजा राम ने जब कहा कि हे महर्षि आप तो आयुर्वेद के बारे में सबकुछ जानते हैं,, इतना आपने कैसे जाना??,,तब महर्षि #काकभुशुण्डि ने कहा कि हे राम,, मैंने 400 वर्ष आयुर्वेद के अध्धयन और औषधियों की खोज में लगाए हैं,, फिर भी मैं बहुत कम ही जानता हूँ,,
आयुर्वेद पर एक महान ग्रन्थ–#चन्द्रयाणकृत पोथी की रचना की उन ऋषि ने,,

बाद में विज्ञान में रुचि और शोध बुद्धि के चलते ब्रह्मांडो और गलेक्सीयों की गणना और खोज पर एक #सविता नामक महान ग्रन्थ रचा,,
आजकल #हॉलीवुड फिल्मों में देखते हैं कि एक ऐसी मिसाइल छोड़ते हैं जो टारगेट के पीछे लगी रहती है,, टारगेट कितना भी मुड़ तुड़ जाए एकदम दिशा बदलकर उल्टा घूम जाए वह पीछे ही लगी रहती है,, महर्षि श्रृंगी कहते हैं कि महर्षि काकभुशुण्डि ने उस समय एक ऐसे ही यंत्र का आविष्कार किया था जिसका नाम–#कागाम #चथवेतु यंत्र था,, जिसको बनाने की प्रेरणा उन्हें कौवे को ऐसे उल जलूल उड़ते देखकर मिली,,,

ऋषियों का एक मत यह भी है कि उस कागाम चथवेतु यंत्र के कारण ही इनका नाम काग पड़ा,, #भुशुण्डि तीव्र मेधा के चलते,,

पता नहीं कैसी #पामर बुद्धि होती है जो अपने पूर्वजों को कौवे बंदर बनाने पर तुल जाती है,, और मजा ये कि हम मान भी बैठते हैं,, वामपंथियों के लिखे कूड़े कर्कट से बाहर निकलकर अपने पराक्रमी पूर्वजों,#ब्रह्मवेत्ता ऋषियों को जानें,, उनका व्यापक अध्धयन करें,

साभार : स्वामी सूर्यदेव जी

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